नकली दुल्हन, शराब से पूजा और परियों का जिक्र… क्यों चर्चा में है 5000 साल पुराना राउलाने मेला? किन्नौर
Kalpa Raulane Festival: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के कल्पा में मनाया जाने वाला राउलाने मेला अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण चर्चा में है। इसे स्थानीय लोग चीने क्यांग भी कहते हैं। इस मेले की खास बात यह है कि इसमें पुरुष महिलाओं की वेशभूषा पहनकर कुल देवता की पूजा करते हैं। यह मेला अपनी परंपराओं के कारण पर्वत संस्कृति की एक जीवित मिसाल है, जिसमें लोग देवता, प्रकृति और पुरखों की मान्यताओं को एक साथ जोड़ते हैं। इस मेले की सबसे अनोखी बात यह है कि इसमें पुरुष महिलाओँ की वेशभूषा पहनकर कुल देवता की पूजा करते हैं, और इस पूजा का अपना अलग धार्मिक महत्व है। नीचे इस पूरे मेले का इतिहास, मान्यताएं, धार्मिक प्रतीक और परंपराओं को विस्तार से समझते हैं।
राउलाने मेला क्या है?
राउलाने मेला लगभग 5000 साल पुरानी परंपरा माना जाता है। यह सर्दियों के आगमन पर मनाया जाता है और इसमें बौद्ध और हिन्दू दोनों समुदाय बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। राउलाने मेला सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि किन्नौर की सांस्कृतिक आत्मा है। यह पर्व लगभग 5000 साल पुरानी परंपरा माना जाता है, जिसकी जड़ें प्राचीन दैविक और लोक विश्वासों में मिलती हैं। यह त्योहार सर्दियों के आगमन पर मनाया जाता है, जब देवता स्थानीय मान्यता के अनुसार अपने लोक यानी स्वर्ग लोग की ओर प्रस्थान करते हैं।सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं।
कैसे की जाती है पूजा?
- मेले की शुरुआत कुल देवता की पूजा से होती है।
- पुरुष महिलाओँ की पारंपरिक वेशभूषा (दोढू) पहनते हैं।
- चेहरा गाछी से ढक दिया जाता है।
- पूजा के दौरान वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं।
- इस विशेष पूजा को निगारो पूजा कहा जाता है।
- पूजा में शराब का प्रयोग किया जाता है, जो इस मेले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
माना जाता है कि यदि यह पूजा न की जाए तो दोष लग सकता है, इसलिए इसे सदियों से निभाया जा रहा है। यही इस पूजा की खास बात है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, राउलाने मेला और निगारो पूजा न केवल धार्मिक अनुष्ठान हैं, बल्कि यह पूरे इलाके की सुरक्षा और समृद्धि से भी जुड़े हुए हैं। माना जाता है कि अगर यह पूजा समय पर और विधिपूर्वक न की जाए, तो कुल देवता असंतुष्ट हो सकते हैं और इसके कारण प्राकृतिक आपदा या दुर्भाग्य आ सकता है। इसलिए यह परंपरा सदियों से बिना रुके निभाई जाती रही है, और हर पीढ़ी इसे अपने श्रद्धा और नियमों के अनुसार आगे बढ़ाती है। इस पूजा की यह महत्वाकांक्षी भूमिका इसे केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि क्षेत्रीय जीवन और आस्था का एक अभिन्न हिस्सा बनाती है।
राउला और राउलाने – नकली दूल्हा और दुल्हन
मेले में दो खास किरदार बनाए जाते हैं:
- राउला: पुरुषराउला (नकली दूल्हा): यह किरदार अक्सर किसी योग्य पुरुष द्वारा निभाया जाता है। राउला का मुख्य उद्देश्य मेले में उत्सव और आनंद का वातावरण बनाना होता है। वह पारंपरिक पोशाक पहनता है और विभिन्न रीति-रिवाजों का पालन करते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेता है।
- राउलाने: नकली दुल्हन (यह किरदार भी पुरुष निभाते हैं)राउलाने (नकली दुल्हन): राउलाने का किरदार किसी महिला या कभी-कभी पुरुष द्वारा निभाया जाता है, जो महिला के रूप में मेले में उपस्थित होता है। यह भी परंपरागत वेशभूषा में होती है और समारोह में राउला के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नृत्यों में भाग लेती है।
राउलाने को चांदी के गहनों और पारंपरिक कपड़ों से सजाया जाता है। उसका चेहरा ढक दिया जाता है और उसे मंदिर ले जाया जाता है। मान्यता है कि अगर कोई ढके हुए चेहरे वाले पुरुष को पहचान ले तो इसे बहुत शुभ माना जाता है।
परियों (सावनी) से जुड़ी मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार फाल्गुन महीने में जब देवी-देवता स्वर्ग लोक चले जाते हैं, तब सावनी नाम की परियाँ और नकारात्मक शक्तियाँ सक्रिय हो जाती हैं। इन्हें लेकर ग्रामीण समाज में डर और सतर्कता की भावना रहती है। राउलाने मेला इसी परंपरा का हिस्सा है। मेले का आयोजन इन शक्तियों को शांत रखने और पूरे इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। मेले में राउला और राउलाने के अभिनय, वेशभूषा और अनुष्ठानात्मक गतिविधियाँ इन परियों और नकारात्मक शक्तियों को नियंत्रित करने और समुदाय में सुरक्षा और सुख-शांति बनाए रखने के प्रतीक माने जाते हैं।
राउलाने मेला इन्हीं शक्तियों को शांत रखने और पूरे इलाके की रक्षा के लिए मनाया जाता है।
मेले के दौरान गांव का माहौल
गांव में पूरे त्योहार में खास व्यंजन बनाए जाते हैं:
- दु (बाड़ी)
- ओगला
- फाफरे
- नमकीन चाय
इसके अलावा किन्नौरी कायंग नाटी का दौर चलता रहता है और रिश्तेदारों की बड़ी जुटान होती है।
मेला चर्चा में क्यों है?
- सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल हो रही हैं।
- पुरुषों का नकली दुल्हन बनकर पूजा में भाग लेना दर्शकों को काफी रोचक और असामान्य लगता है।
- पूजा में शराब का उपयोग हर बार चर्चा में रहता है, जिससे यह परंपरा और अधिक विवादित या दिलचस्प बन जाती है।
- यह मेला 5000 साल पुरानी परंपरा को आज भी जीवित रखता है, जो इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को उजागर करता है।
इन सब वजहों से राउलाने मेला सामाजिक और मीडिया चर्चा का केंद्र बन गया है।
राउलाने मेला किन्नौर की प्राचीन संस्कृति और लोक आस्था का जीवंत प्रतीक है। यह त्योहार न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज को जोड़ने और परंपराओं को आगे बढ़ाने का भी संकेत है।
Kalpa Raulane Festival: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के कल्पा में
🗺️ कैसे पहुँचें?
- 🚆 निकटतम रेलवे स्टेशन: पठानकोट (लगभग 90 किमी), चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन (लगभग 220 किमी)। वहाँ से टैक्सी या बस उपलब्ध है।
- ✈️ निकटतम हवाई अड्डा: गग्गल एयरपोर्ट, कांगड़ा (लगभग 115 किमी) – शिमला एयरपोर्ट (लगभग 250 किमी) भी विकल्प है।
- 🛣️ सड़क मार्ग: धर्मशाला → पालमपुर → कांगड़ा → कल्पा (टैक्सी/बस); मंडी/कुल्लू/मनाली → कल्पा (सुंदर लेकिन लंबा रूट)।



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