यूरेनियम (Uranium): दुनिया का सबसे महँगा और रहस्यमय पदार्थ ⚛️

यूरेनियम (Uranium): दुनिया का सबसे महँगा और रहस्यमय पदार्थ ⚛️

यूरेनियम पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे रहस्यमय और महत्वपूर्ण धातुओं में से एक है। यह रेडियोधर्मी धातु न केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दुनिया में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, बल्कि वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षा रणनीतियों में भी इसका गहरा प्रभाव है। यूरेनियम का सबसे बड़ा रहस्य इसकी अत्यधिक ऊर्जा उत्पादन क्षमता है। केवल एक किलोग्राम यूरेनियम-235 से उतनी ऊर्जा निकल सकती है जितनी कि लाखों किलो कोयले से प्राप्त होती। यही कारण है कि यह पदार्थ न केवल वैज्ञानिकों, बल्कि दुनिया की सरकारों और रणनीतिक विशेषज्ञों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। प्राकृतिक रूप से यूरेनियम पृथ्वी की पपड़ी में पाया जाता है और यह चट्टानों, मिट्टी, पानी, यहां तक कि जीवित प्राणियों में भी न्यूनतम मात्रा में मौजूद होता है। हालांकि इसकी सांद्रता कम होती है, इसके गुण और ऊर्जा क्षमता इसे दुनिया के सबसे मूल्यवान और नियंत्रित संसाधनों में से एक बनाते हैं।

यूरेनियम की उपयोगिता कई क्षेत्रों में फैली हुई है

  • परमाणु ऊर्जा उत्पादन⚡: विद्युत उत्पादन के लिए यूरेनियम का विखंडन (Fission) किया जाता है।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान 🔒: भौतिकी और रसायन विज्ञान में प्रयोग।
  • परमाणु हथियार निर्माण 🔒:अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम से हथियार बनाए जाते हैं।।

  • यूरेनियम का इतिहास

    यूरेनियम की खोज 1789 में जर्मनी के वैज्ञानिक मार्टिन हेनरिक क्लैप्रोथ (Martin Heinrich Klaproth) ने की थी। उन्होंने इसे "यूरेनियम" नाम दिया, जो ग्रह यूरेनस (Uranus) के नाम पर रखा गया। शुरुआती वर्षों में इस धातु का कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं था, लेकिन इसके तत्वों और यौगिकों पर शोध करते हुए वैज्ञानिकों ने इसके अद्वितीय गुणों को पहचानना शुरू किया। 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में यूरेनियम पर कई वैज्ञानिक अनुसंधान हुए। फ्रांसीसी वैज्ञानिक एने-फ्रेडरिक बेकरल (Henri Becquerel) ने 1896 में रेडियोधर्मिता (Radioactivity) की खोज की और यूरेनियम की रेडियोधर्मी प्रकृति को उजागर किया। इसके तुरंत बाद, मैरी और पियरे क्यूरी (Marie & Pierre Curie) ने यूरेनियम और इसके यौगिकों के अध्ययन से रेडियोधर्मिता के सिद्धांत को और गहराई से समझा। 20वीं शताब्दी में यूरेनियम का महत्व और बढ़ा जब वैज्ञानिकों ने परमाणु विखंडन (Nuclear Fission) की खोज की। 1938 में जर्मनी के वैज्ञानिक ओटो हान (Otto Hahn) और फ्रिट्ज़ स्ट्रास्मैन (Fritz Strassmann) ने यूरेनियम-235 के विखंडन के प्रयोग को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया। यह खोज न केवल विज्ञान में क्रांति लेकर आई, बल्कि इसके परिणामस्वरूप परमाणु ऊर्जा और हथियारों की दुनिया का मार्ग प्रशस्त हुआ। विश्व युद्ध II के दौरान यूरेनियम का उपयोग परमाणु हथियारों के निर्माण में हुआ। हिरोशिमा पर गिराए गए 'लिटिल बॉय' बम में यूरेनियम-235 का ही इस्तेमाल किया गया था। इसी समय से यह धातु केवल वैज्ञानिक प्रयोगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा रणनीति और ऊर्जा उत्पादन का भी एक केंद्रीय हिस्सा बन गई।


    भौतिक और रासायनिक गुण ⚙️

    भौतिक और रासायनिक गुण यूरेनियम एक भारी, धात्विक और रेडियोधर्मी तत्व है। यह चांदी-सफेद रंग का ठोस पदार्थ होता है और अत्यधिक घनत्व वाला होता है। इसका घनत्व लगभग 19,050 किलोग्राम प्रति घन मीटर है, जो इसे पृथ्वी पर सबसे भारी धातुओं में से एक बनाता है। इसका वजन इतना अधिक है कि केवल एक घन फीट यूरेनियम का वजन लगभग 1,100 किलोग्राम तक पहुँच सकता है। भौतिक रूप से यूरेनियम में कुछ विशेषताएँ हैं: यह उच्च तापमान पर भी स्थिर रहता है, लेकिन अत्यधिक तापमान पर यह ऑक्सीकृत होकर यूरेनियम ऑक्साइड (UO₂, U₃O₈) बना सकता है। यह कुचला (Malleable) और खींचा जा सकने वाला (Ductile) होता है, लेकिन शुद्ध रूप में इसे संभालना मुश्किल होता है। प्राकृतिक यूरेनियम में रेडियोधर्मिता के कारण धीरे-धीरे ऊर्जा उत्सर्जित होती रहती है। रासायनिक दृष्टि से यूरेनियम कई प्रकार के यौगिक बनाता है। यह आसानी से ऑक्सीजन, फ्लोरीन और नाइट्रोजन जैसे तत्वों के साथ प्रतिक्रिया करता है। इसके यौगिक जैसे यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (UF₆) परमाणु ईंधन संवर्धन (Enrichment) प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यूरेनियम की प्राकृतिक उपस्थिति पृथ्वी की पपड़ी में न्यूनतम मात्रा में होती है। यह चट्टानों, मिट्टी, पानी और यहां तक कि जीवित प्राणियों में भी कम मात्रा में पाया जाता है।

    आइसोटोप

    • यूरेनियम-235 (U-235) ⚡: प्प्राकृतिक यूरेनियम का लगभग 0.7% U-235 होता है। यह परमाणु विखंडन (Nuclear Fission) के लिए अत्यंत उपयोगी है। U-235 का विखंडन होने पर बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जो बिजली उत्पादन और हथियारों के लिए महत्वपूर्ण है।
    • यूरेनियम-238 (U-238) 🔒: प्राकृतिक यूरेनियम का लगभग 99.3% हिस्सा U-238 होता है। यह सीधे विखंडन के लिए उपयोगी नहीं है, लेकिन इसे प्लूटोनियम-239 में बदला जा सकता है।U-238 रेडियोधर्मी है, लेकिन इसकी विखंडन प्रक्रिया धीमी होती है।

    संवर्धित यूरेनियम

    • लो-संवर्धित (LEU): रिएक्टर के लिए 3–5% U-235
    • उच्च-संवर्धित (HEU): हथियारों के लिए 90% से अधिक U-235

    परमाणु ऊर्जा उत्पादन ⚡

    परमाणु ऊर्जा उत्पादन यूरेनियम का सबसे बड़ा और विश्वव्यापी उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन में होता है। परमाणु रिएक्टरों में यूरेनियम-235 को विखंडन (Fission) के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। विखंडन की प्रक्रिया में यूरेनियम के परमाणु टूटते हैं और भारी मात्रा में गर्मी (Heat) उत्पन्न होती है। यह गर्मी पानी को भाप में बदलती है, और फिर भाप टर्बाइन को घुमाकर बिजली पैदा करती है। ऊर्जा की तुलना केवल 1 किलोग्राम यूरेनियम-235 से जितनी ऊर्जा निकलती है, उतनी लगभग 15 लाख किलोग्राम कोयला जलाने से मिलती है। यही कारण है कि यूरेनियम को “अत्यधिक ऊर्जा वाला ईंधन” कहा जाता है। परमाणु बिजलीघर विश्व के कई देशों में यूरेनियम रिएक्टर चल रहे हैं। उदाहरण: अमेरिका, फ्रांस और जापान में बड़े पैमाने पर यूरेनियम आधारित रिएक्टर। भारत में कुकरम, तारापुर और राजस्थान के रिएक्टर। यूरेनियम रिएक्टरों का लाभ: बड़ी मात्रा में ऊर्जा उत्पादन। जीवाश्म ईंधनों की तुलना में कम पर्यावरणीय प्रदूषण। खतरे और चुनौतियाँ परमाणु कचरा (Nuclear Waste) का सुरक्षित निपटान। रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा। प्राकृतिक आपदाओं या दुर्घटनाओं की स्थिति में गंभीर नुकसान।

    परमाणु बिजलीघर

    • अमेरिका, फ्रांस और जापान में बड़े रिएक्टर
    • भारत में कुकरम, तारापुर और राजस्थान रिएक्टर

    खतरे और चुनौतियाँ ⚠️

    • परमाणु कचरे का सुरक्षित निपटान
    • रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा
    • प्राकृतिक आपदाओं में गंभीर नुकसान

    परमाणु हथियार में उपयोग 💣

    हिरोशिमा पर गिराए गए 'लिटिल बॉय' बम में U-235 का इस्तेमाल हुआ। उच्च-संवर्धित यूरेनियम HEU से केवल कुछ किलो में बड़े विनाश की क्षमता होती है।


    यूरेनियम खनन और प्रमुख देश ⛏️

    यूरेनियम का उत्पादन और खनन जटिल और महँगी प्रक्रिया है। प्रमुख देश:

    • कजाकिस्तान – वैश्विक उत्पादन का 40%
    • कनाडा – उच्च गुणवत्ता वाला यूरेनियम
    • ऑस्ट्रेलिया – सबसे बड़ा भंडार
    • नामीबिया, रूस, नाइजर – महत्वपूर्ण स्रोत
    • संयुक्त राज्य अमेरिका – सीमित उत्पादन
    • भारत – 160,000 टन ज्ञात भंडार

    स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव 🌱

    • किडनी और अंगों पर असर
    • कैंसर का खतरा
    • गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर प्रभाव
    • पर्यावरणीय प्रदूषण और रेडियोधर्मी रिसाव

    रोचक तथ्य 🤯

    • प्राकृतिक परमाणु रिएक्टर – ओक्लो (Oklo), गैबोन
    • यूरेनियम ग्लास हल्की हरी चमक छोड़ता है
    • केवल कुछ किलो U-235 से पूरे शहर के बराबर ऊर्जा

    भारत और वैश्विक स्थिति 🌏

    भारत में सीमित भंडार हैं, लेकिन परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए पर्याप्त। वैश्विक रूप से यूरेनियम भंडार और उत्पादन असमान हैं, और कुछ देश रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से प्रमुख हैं।

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