हिमाचल प्रदेश में चेहरा स्कैन कर राशन वितरण की नई व्यवस्था शुरू, ओटीपी और फिंगरप्रिंट का झंझट खत्म..

हिमाचल प्रदेश की सस्ते राशन की दुकानों में अगले माह से उपभोक्ताओं का चेहरा स्कैन कर राशन वितरित किया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को ओटीपी और बायोमीट्रिक के दौरान सर्वर डाउन होने की परेशानियों से राहत मिलेगी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से नई तकनीक लागू करने की तैयारियां की जा रही हैं। विभाग एक सप्ताह के भीतर ही फेस ऑथेंटिकेशन एप लॉन्च करेगा। एप लॉन्च करने की तैयारियां चल रही हैं और जुलाई से चेहरा स्कैन कर राशन लेने की योजना शुरू हो जाएगी। एक बार एप लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को ओटीपी और बायोमीट्रिक से जुड़ी दिक्कतों से मुक्ति मिलेगी। डिपुओं में बार-बार सर्वर फेल होने की समस्या को दूर करने के लिए यह नई तकनीक लाई जा रही है। फेस ऑथेंटिकेशन एप में डिपुओं से राशन लेने के लिए उपभोक्ताओं का चेहरा स्कैन किया जाएगा और आधार से मिलान होने के बाद ही राशन मिलेगा। यह एप राशन वितरण करने वाले डिपो संचालक के मोबाइल पर रहेगा। इसके लिए आईटी विभाग के अधिकारियों से भी सलाह-मशविरा किया जा रहा है। तकनीकी जांच के बाद इसे एक सप्ताह के बाद पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। नई तकनीक लागू होने के बाद सभी डिपो संचालकों के पास एंड्रॉयड मोबाइल होना जरूरी होगा। चेहरा स्कैन होने के बाद जानकारी सीधे विभाग के डेटा से मिलाई जाएगी और पहचान सही होने पर राशन दिया जाएगा। हालांकि, उपभोक्ताओं को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी पूरी होना जरूरी है। विभाग की ओर से एप को लॉन्च करने की तैयारियां की जा रही हैं। डिपुओं में जल्द ही यह नई व्यवस्था शुरू होने के बाद उपभोक्ताओं को सर्वर डाउन की समस्याओं से राहत मिलेगी। हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक आधुनिक व पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 5100 से अधिक राशन डिपुओं में अब करीब साढ़े 19 लाख परिवारों को फेस ऑथेंटिकेशन और आई-स्कैनिंग के जरिए राशन उपलब्ध कराया जाएगा।

जल्द लगेंगी नई हाईटेक मशीनें

खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश के सभी डिपुओं में पुरानी पॉस मशीनों की जगह नई तकनीक से लैस पॉस मशीनें लगाई जाएंगी। इन मशीनों से उपभोक्ताओं को अब फिंगरप्रिंट या ओटीपी जैसी तकनीकी दिक्कतों से भी राहत मिलेगी। परिवार के किसी भी सदस्य की फेस पहचान या आंखों की स्कैनिंग से राशन प्राप्त किया जा सकेगा। इसके लिए सभी राशन कार्डधारकों के सदस्यों की ई-केवाईसी पहले ही पूरी कर ली गई है।

डिजिटल बिल की सुविधा

नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को राशन वितरण का डिजिटल बिल भी प्रिंट कर दिया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। खाद्य आपूर्ति निदेशालय शिमला की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में यह व्यवस्था लागू कर दी जाए।

टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में

खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय शिमला के निदेशक आरके गौतम ने बताया कि डिपुओं में वर्तमान में इस्तेमाल हो रही पुरानी पॉस मशीनों को हटाकर नई मशीनें वितरित की जाएंगी। इसके लिए टेंडर की अंतिम प्रक्रियाएं चल रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं को सरल, सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से राशन मिल सके।

राज्य में 19.60 लाख राशन कार्डधारक

प्रदेश में वर्तमान में 19 लाख 60 हजार से अधिक राशन कार्डधारक हैं। इन्हें लगभग 5100 उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से अंत्योदय, बीपीएल और पीएचएच परिवारों को मुफ्त व रियायती दरों पर, जबकि एपीएल और अन्य श्रेणियों को सब्सिडी आधारित सस्ता राशन उपलब्ध कराया जाता है। खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष से राशन डिपुओं में यह नई तकनीक लागू होने से वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनेगी।

कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखें

  • चेहरा स्कैन आधारित राशन व्यवस्था का लाभ लेने के लिए सभी उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी पूरी होना जरूरी है।
  • डिपो संचालकों के पास एंड्रॉयड मोबाइल होना अनिवार्य है।
  • चेहरा स्कैन के बाद पहचान विभाग के डेटाबेस से मिलान होगी, तभी राशन मिलेगा।
  • ओटीपी और फिंगरप्रिंट से जुड़ी तकनीकी परेशानियों से राहत सुनिश्चित की गई है।
  • डिजिटल बिल के माध्यम से राशन वितरण और अधिक पारदर्शी होगा।

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