हिमाचल में परिवहन क्रांति: अब एचआरटीसी खरीदेगा 1,000 नई बसें, कौन-कौन सी बसें शामिल होंगी?
शिमला | 7 अगस्त, 2025
हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HRTC) के बेड़े में 1,000 नई बसों को शामिल करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को मजबूत करना और कनेक्टिविटी में सुधार लाना है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को मजबूत करना और कनेक्टिविटी में सुधार करना है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एचआरटीसी) के लिए 1,000 नई बसों की खरीद की घोषणा की है, जो चरणबद्ध तरीके से मौजूदा 3,200 बसों के बेड़े में शामिल की जाएंगी।
एक ऐतिहासिक पहल
राज्य सरकार ने आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और समावेशी परिवहन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए यह फैसला लिया है। 3,200 बसों के मौजूदा बेड़े में नई बसों को चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा, खासकर दूरदराज, ग्रामीण और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों की पहुंच बढ़ाने के लिए।मुकेश अग्निहोत्री ने इसे हिमाचल के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बस बेड़े का प्रतिस्थापन बताया। उनके अनुसार, यह केवल बसों की संख्या में वृद्धि नहीं, बल्कि एक बदलावकारी सोच है — जिसमें सार्वजनिक परिवहन को आत्मनिर्भर, कुशल और पर्यावरण-संवेदनशील बनाने की प्रतिबद्धता शामिल है। सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को सुचारू बनाने के लिए ₹110 करोड़ की मंजूरी दी है, जिसके अंतर्गत EV चार्जिंग स्टेशनों का एक व्यापक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जहां इलेक्ट्रिक बसों की खरीद सरकार द्वारा सीधे की जा रही है, वहीं डीज़ल बसों की खरीद एचआरटीसी अपने संसाधनों से कर रहा है।राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 37 से 42 सीटों वाली छोटी बसों को प्राथमिकता दी है। इससे एचआरटीसी को उन क्षेत्रों तक अपनी सेवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी, जहां बड़े वाहनों का संचालन संभव नहीं है। 100 मिनी बसें, जो खरीदी जा रही हैं, लास्ट माइल कनेक्टिविटी को सुनिश्चित करेंगी और ग्रामीण परिवहन ढांचे को मज़बूती देंगी।
“यह केवल बसों की संख्या नहीं बढ़ा रहा, बल्कि एक बदलावकारी सोच है — जिसमें सार्वजनिक परिवहन को आत्मनिर्भर, कुशल और पर्यावरण-संवेदनशील बनाने की प्रतिबद्धता शामिल है।”
— उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री
पर्यावरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए ₹110 करोड़ की EV चार्जिंग नेटवर्क परियोजना को मंजूरी दी गई है। जहां इलेक्ट्रिक बसें सरकार द्वारा खरीदी जा रही हैं, वहीं डीज़ल बसें एचआरटीसी के अपने संसाधनों से खरीदी जाएंगी।
सरकार की प्राथमिकता: छोटी और स्मार्ट बसें
राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 37 से 42 सीटों वाली छोटी बसों को प्राथमिकता दी है, ताकि संकरी और पहाड़ी सड़कों पर भी सुविधा बनी रहे। प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा पहली बार 1000 बसों का फ्लीट बदला जा रहा है इससे पहले किसी भी सरकार में ऐसा नहीं हुआ है। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि एचआरटीसी को एक सशक्त और आत्मनिर्भर उपक्रम के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर दृढ़ व दक्ष प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की परिवहन सेवाएं देशभर में एक मिसाल बन सकें।
100 मिनी बसें “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” के उद्देश्य को पूरा करेंगी और ग्रामीण परिवहन को मजबूती देंगी।
अब तक की प्रगति और खरीद योजना
- 24 वोल्वो बसें पहले ही शामिल की जा चुकी हैं।
- 297 टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों के लिए ऑर्डर जारी किया गया है।
- अभी की योजना में शामिल हैं:
- 327 इलेक्ट्रिक बसें
- 250 डीज़ल बसें
- 100 मिनी बसें
- भविष्य में 500 और इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जाएंगी।
एचआरटीसी — घाटे में भी सेवा का प्रतीक
एचआरटीसी हर दिन लाखों यात्रियों को सेवा प्रदान करता है, जिनमें से कई रूट घाटे में चलते हैं। इसके बावजूद, निगम राज्य के सबसे कठिन इलाकों तक लगातार सेवाएं दे रहा है — यह जनसेवा की असली मिसाल है।
अंतिम उद्देश्य: आत्मनिर्भर और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा:
“हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़कें केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि जीवनरेखा हैं। हमारा लक्ष्य एचआरटीसी को ऐसा संस्थान बनाना है जो आत्मनिर्भर, भरोसेमंद और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हो।”
— उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री
इस परिवहन क्रांति के साथ, हिमाचल प्रदेश अब हरित, टिकाऊ और सर्वसमावेशी सार्वजनिक परिवहन मॉडल की ओर एक मजबूत कदम बढ़ा चुका है।
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